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Rajasthan News

बिना चूल्हा 36 हजार लोगों के लिए बनातें है खाना:रोज बनती हैं 3 लाख रोटियां,रोज दाल-चावल और चाय-कॉफी भी

क्या आप जानते हैं राजस्थान की सबसे बड़ी रसोई कहां हैं?

  • ऐसी रसोई, जो एक बिल्डिंग में 3 फ्लोर तक फैली हुई है।
  • 2 घंटे में यहां 25 से 35 हजार लोगों का खाना बन जाता है।
  • 1 घंटे में 50 हजार से ज्यादा रोटियां, पूड़ी और पराठे तैयार हो जाते हैं।
  • मेन्यू में दाल-चावल भी होते हैं और चाय-कॉफी भी।

इतना सबकुछ और वो भी बिना किसी गैस चूल्हे के, जी हां! खाना पकाने में यहां आग का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

नए साल पर ‘अनदेखा-अनसुना राजस्थान’ सीरीज कड़ी में देखिए और पढ़िए- राजस्थान की सबसे बड़ी रसोई में कैसे तैयार होता है ‘शिव बाबा का भंडारा’….

पहले पढ़िए- कैसे तैयार हुई मेगा किचन…

1994 का दौर…जब लोगों के लिए गैस कनेक्शन भी मिल पाना मुश्किल था। उस समय ब्रह्माकुमारीज संस्था की टीम ने जर्मनी में डेवलप सोलर कुकर के बारे में पता लगाया। टीम ने उस पर काम किया और निर्णय लिया कि इसे आबूरोड स्थित शांतिवन में स्थापित किया जाएगा।

जर्मनी से सोलर कुकर का सेटअप यहां लाया गया। पहली बार 800 लोगों के लिए भाप से खाना तैयार किया गया। जब यह प्लान सक्सेस हुआ तो इसकी क्षमता को बढ़ाकर 15000 लोगों के लिए खाना बनाना शुरू किया गया। धीरे-धीरे जब संस्था से जुड़े लोगों की संख्या बढ़ने लगी तो इस रसोई को ऑटोमेटेड किचन में तब्दील कर दिया गया। यानी ऐसी किचन जिसमें रोटियां बनाने से लेकर हर काम ऑटोमेटिक मशीन से होता है। आज यहां सोलर कुकर से करीब 3 टन स्टीम पैदा कर 30 हजार लोगों के लिए ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर तैयार होता है।

अब जानिए- इस हाईटेक रसोई की खासियत

इस रसोई में साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाता है। जब हम यहां रसोई की कवरेज के लिए पहुंचे तो सबसे पहले सर्जिकल कैप पहचनाई गई।

गेट में एंट्री करते ही हाथ धोने के लिए साबुन रखा था। किचन का प्रोटोकॉल है कि बिना सर्जिकल कैप और हाथ धोए एंट्री नहीं है। जब इस किचन में पहुंचे तो 20 हजार लोगों का खाना बन रहा था।

पहला किचन जहां तीन फ्लोर, भजनों के बीच बनता है खाना

यह किचन जिस बिल्डिंग में मौजूद है उसे ‘शिव भोलेनाथ भंडार’ नाम दिया गया है। यह एक तीन मंजिला कॉम्पलेक्स की तरह है। तीनों फ्लोर पर अलग-अलग काम होते हैं।

  • पहला फ्लोर : यहां दाल-चावल, सब्जी, सलाद बनते हैं।
  • दूसरा फ्लोर : रोटी के साथ पराठा, पूड़ी आदि बनाई जाती है।
  • तीसरा फ्लोर : यहां ब्रेड या सूखा नाश्ता तैयार होता है।

खास बात यह है कि सुबह जब से किचन शुरू होती है तब से लेकर पूरा खाना बनने तक भोलेनाथ के भजन चलते रहते हैं। मान्यता है कि इससे भोजन में शुद्धता और पवित्रता बनी रहती है

खाना बनाने से लेकर सब्जी काटने के लिए अलग-अलग चैंबर

एंट्री होते ही स्टीम मशीन है, जिसमें ब्रेकफास्ट के लिए भाप से इडली और ढोकला तैयार होता है। इसके पास ही ऊपर की तरफ एक चैंबर बना है, जहां चावल और दाल तैयार की जाती है। यहीं पर सब्जियों को धोने, काटने और बनाने की ऑटोमैटिक मशीनें लगी हैं। खाना बनाने से लेकर सब्जी काटने के लिए अलग-अलग चैंबर बने हुए हैं।

1 बार में तैयार हो जाती है 6 हजार लोगों की सब्जी

किचन का मैनेजमेंट देख रहे बीके कुंडल भाई ने बताया कि सब्जी बनाने में महज चंद मिनट का समय लगता है। अगर एक बार में 6 हजार लोगों के लिए सब्जी तैयार करनी है तो इसमें 45 मिनट लगेंगे। इसके लिए पहले तैयारी करके रख ली जाती है।

यहां सब्जी बनाने की करीब 5-5 (यूनिट) यानी बर्तन है। इनमें सब्जी के अलावा शाम के खाने के लिए खिचड़ी भी पकाई जाती है।

आटा छानने से लेकर गूंथने और रोटी बनाने का काम ऑटोमैटिक

इस कॉम्पलेक्स में दूसरे फ्लोर पर रोटी डिपार्टमेंट बना है। आटा छानने से लेकर गूंथने तक काम ऑटोमैटिक भी रहता है। यहां तीन तरीके से रोटी- पराठा और पुड़ी बनाई जाती है। पहला ऑटोमैटिक मशीन, दूसरा थर्मिंग ऑयल तवे से और तीसरा मैन्युअल, यानी सेवादार खुद भी हाथ से रोटियां बनाते हैं।

1 घंटे में तैयार होती है हजारों की संख्या में रोटी-पराठा और पूड़ी

रोटी डिपार्टमेंट का अधिकांश जिम्मा महिलाओं को दे रखा है। यहां रोटी, पूड़ी और पराठा तीनों के लिए अलग-अलग चैंबर और टीम हैं। रोटी बनाने के लिए 6 अलग-अलग यूनिट बना रखी हैं। प्रत्येक यूनिट 1 घंटे में 2 हजार रोटियां बना सकती है। ऐसे में एक बार में 12 हजार रोटियां बनती हैं।

थर्मिक आयलिंग प्रोसेस से 8 हजार पराठे तैयार किए जाते हैं। वहीं 20 हजार पूड़ी यहां एक बार में तैयार होती है। ट्रेवल करने वाले सेवादारों के लिए ‘जर्नी फूड किट’ भी तैयार किया जाता है। पूरे दिन में करीब 5 टन आटा से 2 लाख रोटियां, पराठा और पूड़ी के साथ जर्नी फूड बनाया जाता है।

500 डिग्री सेंटीग्रेड टेम्प्रेचर पर खौलते होते पानी की बनती है भाप

बॉयलर और स्टीम डिपार्टमेंट देख रहे बीके कुमार भाई ने बताया कि यहां पूरे दिन में 3 टन स्टीम जनरेट की जाती है। यहां 4 बॉयलर लगे हैं, जो 1 घंटे में 600 से 800 किलो लीटर स्टीम जनरेट करते हैं।

पानी जब 500 डिग्री टेम्प्रेचर की कॉइल के कॉन्टैक्ट में आता है तो वह स्टीम में कन्वर्ट हो जाता है। इस दौरान उसका टेम्प्रेचर करीब 200 डिग्री तक रहता है। संस्था में आने वाले लोगों की संख्या पर निर्भर करता है कितने लोगों का खाना बनना है, उसी हिसाब से स्टीम चाहिए होती है।

सेवा के लिए जुटते हैं भाई-बहन सेवादार, नि:शुल्क सेवा

इस किचन में हर समय 500 से ज्यादा सेवादार की टीम रहती है। ये यहां निशुल्क सेवा देते हैं। पूरा खाना बनने के बाद इसे एक बड़े डायनिंग हॉल में रखा जाता है। यहां से एक थाली में इसे परोस कर बाबा को भोग लगाया जाता है, जिसके बाद इसे प्रसाद के तौर पर डायनिंग हॉल में रखे खाने में मिलाया जाता है। इसलिए, संस्था इसे बाबा का प्रसाद कहती है।

इस किचन से जुड़े कुछ रोचक फैक्ट

एक सप्ताह की सब्जियों और एक साल का अनाज एडवांस स्टॉक : यहां एक सप्ताह की सब्जियों और एक साल का अनाज का एडवासं स्टॉक रहता है। हर सात दिन में सब्जियों से भरे ट्रक यहां स्टोर में खाली किए जाते हैं।

एक खास रेसिपी जो 1 महीने तक खराब नहीं होती : यहां आटे, घी और तेल से एक जर्नी फूड तैयार किया जाता है। इसकी खास बात ये है कि ये 1 महीने तक खराब नहीं होती और इसे दूध के साथ भी खाया जाता है।

एक दिन में 5 लाख रुपए का खर्च

यहां आने वाले लोगों की संख्या घटती-बढ़ती रहती है। अभी यहां एक टाइम में 15 हजार लोग आते हैं। अकाउंट डिपार्टमेंट संभाल रहे बीके पानमल भाई ने बताया कि औसतन एक दिन में खाने पर करीब 5 लाख रुपए खर्च आता है।

एक साथ 5 हजार लोगों के खाने की व्यवस्था

यहां एक साथ 5 हजार लोगों के खाने के लिए अलग-अलग डायनिंग हॉल बने हुए हैं। एक डायनिंग हॉल में 4 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था है। इसके अलावा तीन फ्लोर का एक और डायनिंग हॉल है, जिसके अलग-अलग ब्लॉक में 1 हजार लोग आसानी से बैठकर खाना खा सकते हैं।

अब पढ़ें, सबसे विश्व की सबसे बड़ी आध्यात्मिक संस्था के बारे में

350 भाई-बहनों के साथ माउंट आबू में शुरुआत

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना वर्ष 1937 में हैदराबाद के सिंध प्रांत में हीरे-जवाहरात के प्रसिद्ध व्यापारी दादा लेखराज ने की थी। शुरुआत में संस्था का नाम ओम मंडली था। भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद वर्ष 1950 में ब्रह्मा बाबा 350 भाई-बहनों के साथ माउंट आबू, राजस्थान पहुंचे। जहां से नए सिरे से संस्था के सेवाकार्यों की शुरुआत हुई और संस्था का नाम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय रखा गया। तब से लेकर आज तक संस्थान का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू है।

ऐसा है शांतिवन परिसर

संस्थान का आबू रोड में स्थित शांतिवन परिसर 80 एकड़ में बना है। इसकी नींव वर्ष 1996 में रखी गई। इसमें करीब 15 हजार लोगों के रहने की व्यवस्था है। यहां की व्यवस्थाओं के कुशल संचालन के लिए रोटी, कपड़ा, कंस्ट्रक्शन, पानी, सफाई, बिजली जैसे 90 डिपार्टमेंट बनाए गए हैं।

इसमें बना डायमंड हॉल एशिया के सबसे बड़े हॉल में शामिल है। इसमें एक साथ 20 हजार लोग बैठ सकते हैं। साथ ही 8 भाषाओं के ट्रांसलेशन की व्यवस्था है। इसके साथ ही मनमोहिनी वन परिसर में पांच हजार और आनंद सरोवर परिसर में तीन हजार लोगों के आवास-निवास की व्यवस्था है।

माउंट आबू में हैं मुख्य तीन परिसर संस्थान के माउंट आबू में स्थित एकेडमी फॉर ए ग्लोबल वर्ल्ड परिसर में चार सौ लोगों और पांडव भवन परिसर में 200 लोगों के रहने की व्यवस्था है। वहीं पीस पार्क को पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से विकसित किया गया है, जहां हजारों की संख्या में पेड़-पौधे लगे हैं। साथ ही विशाल पार्क और म्यूजियम बना हुआ है।

140 देशों में 5000 से अधिक सेवाकेंद्र

वर्तमान में संस्थान के भारत सहित विश्व के 140 देशों में पांच हजार से अधिक सेवा केंद्र हैं। 50 हजार से अधिक ब्रह्माकुमारी बहनें समर्पित होकर अपनी सेवाएं दे रही हैं। 15 लाख यहां के नियमित विद्यार्थी हैं जो संस्थान के सेवाकेंद्रों पर जाकर नियमित राजयोग का अभ्यास और सत्संग करते हैं। समाज के सभी वर्गों की सेवा के लिए 20 प्रभाग (जैसे- समाजसेवा प्रभाग, राजनीतिक प्रभाग, शिक्षा प्रभाग, कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग) बनाए गए हैं। जिनके माध्यम से सेमीनार, वर्कशॉप, सभा द्वारा लोगों को आध्यात्म का संदेश दिया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र ने दिया विश्व शांति पुरस्कार

1986 में यूएन द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय शांति वर्ष के दौरान संस्था ने अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट का संचालन किया। जिसका नाम था दी मिलियन मिनिट्स ऑफ पीस अपील। यह अभियान विश्व के 88 देशों में पहुंचा। सैकड़ों कम्पनियों और आर्गनाईजेशन ने इसमें साथ दिया। इस अभियान के तहत एक बिलियन मिनटस से ज्यादा समय लोगों ने प्रार्थना, मेडिटेशन और सकारात्मक संकल्पों के द्वारा विश्व को शांति का दान दिया। इस अभियान की सफलता के बाद 15 सितंबर 1987 में संस्था की मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि को संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में अवर महासचिव वेसीली एस. सैफ्रांचक ने अंतरराष्ट्रीय शांतिदूत पुरस्कार संस्था को प्रदान किया। इसके अलावा इस वर्ष संस्था को 6 अन्य पीस अवार्ड मिले।

संस्थान की सामाजिक सेवाएं

संस्थान ज्ञान-ध्यान के साथ यौगिक खेती प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसमें खेती को योग से जोड़ा गया है। यहां से प्रशिक्षण लेकर देशभर में दो हजार किसान यौगिक खेती कर रहे हैं। साथ ही जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति, जेलों में बंदियों में सुधार, ऊर्जा संरक्षण, स्लम बस्तियों के कल्याण से लेकर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे क्षेत्रों में भी देशव्यापी स्तर पर सेवा कार्य किए जा रहे हैं।

मंडे स्टोरी के बाकी एपिसोड यहां देखें-

1. नकल करने वालों को मिली 100% पास होने की गारंटी:अधिकतर के पैरेंट्स सरकारी नौकरी में; होटल से भी पकड़े गए 6 कैंडिडेट

सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक की जांच में रोजाना चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब एक और मास्टरमाइंड पकड़ा गया है। भर्ती परीक्षा में जो अभ्यर्थी GK के पेपर में नकल करते हुए पकड़े गए हैं, उनमें 80% के फैमिली मेंबर्स सरकारी जॉब में हैं। नकल गिरोह के साथ पकड़ी गईं 6 लड़कियों में कई काफी प्रभावशाली बैकग्राउंड से हैं.

Tushar Tanwar

नमस्कार मेरा नाम तुषार तंवर है. मैं 2022 से हरियाणा न्यूज़ टुडे पर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहा हूं. मैंने आर्ट्स से बी ए की है. मेरा उद्देश्य है कि हरियाणा की प्रत्येक न्यूज़ आप लोगों तक जल्द से जल्द पहुंच जाए. मैं हमेशा प्रयास करता हूं कि खबर को सरल शब्दों में लिखूँ ताकि पाठकों को इसे समझने में कोई भी परेशानी न हो और उन्हें पूरी जानकारी प्राप्त हो. विशेषकर मैं जॉब और ऑटोमोबाइल से संबंधित खबरें आप लोगों तक पहुँचाता हूँ जिससे रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं साथ ही नई गाड़ियों के बारे में जानकारी मिलती है.

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