हरियाणा के सीएमओ की कार्रवाई में शिकायतों पर लापरवाही करने वाले अधिकारियों व विभागों की अब खैर नहीं है

चंडीगढ़ :- अक्सर प्रदेश मुख्यालय और सीएम विंडों पर आने वाली शिकायतों पर जवाब मांगे जाने की सूरत में भी ढुलमुल रवैया अपनाने वाले अफसरों और विभागों की खैर नहीं है। हरियाणा सीएमओ ( मुख्य मंत्री आफिस ) के साथ-साथ आए दिन विजिलेंस ने भी इस तरह के विभागों और अफसरों को चिन्हित करने की मुहिम चला दी है। खुद सूबे के मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त पाए जाने वाले अफसरों और कर्मियों को नहीं छोड़ने का संकल्प सार्वजनिक तौर पर दोहरा दिया है। सीएम ने साफ कर दिया है कि करप्शन के मामले में अपना हो या फिर पराया, हमारे पास में कोई माफी और बख्शने का खाना नहीं हैं। पिछले दिनों के कईं उदाहरण देकर सीएम ने साफ कर दिया है कि कोई कितने भी बडे कद वाला अफसर अथवा कर्मी क्यों नहीं हो, हमने कार्रवाई के लिए अफसरों को फ्री हैंड दिया है।

इसके साथ ही अब इस तरह के विभागों को भी चिन्हित किया जा रहा है, जो विजिलेंस, सीएम विंडों और सीएम आफिस में अऩ्य माध्यमों से शिकायत जाने के बावजूद भी खौंफजदा नहीं है। खासतौर पर सीएम विंडों की मानीटरिंग कर रहे वरिष्ठ आईएएस देवेंद्र सिंह और बाकी अफसरों ने लापरवाह विभाग और अफसरों को चिन्हित करने की मुहिम भी चला दी है, जो शिकायतें होने के बाद भी उन पर गंभीरता नहीं दिखाने काम करते हैं।

अब न्यायिक सिस्टम की तरह सी लंबित मामलों और अनावश्यक देरी करने वालों पर लालपट्टी लगा दी जाएगी। अर्थात रेड जोन में आने वाले विभागों और अफसरों की खैर नहीं हैं। फिलहाल भी सीएम विंडो और मुखअयमंत्री आफिस की ओर से कुछ विभागों को चिन्हित कर लिया है, जिन्हें रेड जोन में डाल दिया गया है। खास बात यह है कि इन विभागों में पुलिस महमकमा, राज्य का पंचायत विभाग और हमेशा ही चर्चाओं में बने रहने वाले बिजली महकमा शामिल है। इसके अलावा नगर पालिका, परिषदों, नगर निगमों में व्याप्त अव्यवस्था के कारण इस सूची में शहरी स्थानीय निकाय विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के नाम शामिल हैं। इसके अलावा राजस्व, शहरी संपदा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, कृषि विभाग में सबसे अधिक शिकायतें लंबित हैं। आंकड़ों पर गौर करें, तो शिकायत जनवरी से 8 नवंबर 2022 तक की हैं। इन विभागों का पिछले एक साल का रिकॉर्ड भी लंबित शिकायतें निपटाने के मामलों में बहुत ही खराब चला रहा है। अब जब शिकंजा कसने की चेतवानी दी गई है, तो कुछ लोगों की नींद हराम हो गई है।

वैसे, सीएम विंडो वाली शिकायतों के वक्त पर निपटारा नहीं करने के मामले में 38 विभागों को लालजोन में डाल दिया गया है। वैसे, इस समस्याओं के निस्तारण के मामले में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का ओवरऑल स्कोर ही शत-प्रतिशत उल्लेखनीय रहा है। शिकायतकर्ताओं को तय समय में न्याय नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपना लिया है। बेलगाम विभागों पर शिकंजा कसने के लिए मुख्यमंत्री ने सिंचाई सलाहकार देवेंद्र सिंह की ड्यूटी लगा दी है। जिसके बाद से अब कामकाज में बदलाव और कुछ लोगों की नींद हराम होना तय माना जा रहा है। उन्होंने इस क्रम में गत दिवस सीएम विंडो की पहली समीक्षा बैठक लेकर 38 विभागों को चिन्हित कर दिया है। शिकायतें निपटाने के मामले में इन विभागों में ओवरऑल मिश्रित स्कोर 60 प्रतिशत से नीचे है। मुख्यमंत्री ने शिकायतें निपटाने में लचर अधिकारियों और विभागों पर कार्रवाई के लिए बोल दिया है। जिसमें शिकायतों पर 30 दिन में उचित कार्रवाई का वक्त दिया गया है।

पुलिस, विकास एवं पंचायत, बिजली, शहरी स्थानीय निकाय, स्कूल शिक्षा, राजस्व, शहरी संपदा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, कृषि विभाग में सबसे अधिक शिकायतें लंबित पड़ी हैं। शिकायतें जनवरी से 8 नवंबर 2022 तक की हैं। इन विभागों का पिछले एक साल का रिकॉर्ड भी समस्या निराकरण के मामले में खराब है। वैसे, रेड जोन में पुलिस, पर्यावरण, स्वास्थ्य, बिजली, रोजगार, औद्योगिक प्रशिक्षण, सिंचाई, हाउसिंग, उद्योग एवं वाणिज्य, कृषि, पीडब्ल्यूडी, महिला एवं बाल विकास, खाद्य एवं आपूर्ति, परिवहन, श्रम, सहकारिता, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, स्कूल शिक्षा, पर्यटन, आबकारी एवं कराधान, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, वित्त, वन, हाउसिंग फार ऑल, जेल एवं होमगार्ड, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, शहरी विकास प्राधिकरण, खान एवं भूगर्भ आदि विभागों को डाला गया है। वैसे, सबसे ज्यादा मामले पुलिस, पंचायत और बिजली महकमे से जुडे़ ज्यादा है, जिनकी संख्या हजारों में हैं। कुल मिलाकर आने वाले दिनों में रेड जोन में आने वाले विभागों और अफसरों पर गाज गिरना तय है।

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