तरावड़ी में सम्राट पृथ्वीराज स्मारक की परिकल्पना होगी साकार, यहीं हुआ था अंतिम संघर्ष

करनाल :- करनाल के तरावड़ी में प्रस्तावित सम्राट पृथ्वीराज चौहान स्मारक एवं शोध संस्थान के निर्माण में आ रही बाधाओं को जल्द दूर करने की दिशा में अब तेजी से तमाम जरूरी कदम उठाए जाएंगे। यह संकेत खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने झज्जर के कुलाना गांव में आयोजित जनसभा में दिए हैं। यही नहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से भी इस संदर्भ में विस्तृत विवरण प्राप्त होने के आधार पर हरसंभव हस्तक्षेप किए जाने का आश्वासन मिला है।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डा. वीरेंद्र सिंह चौहान काफी समय से इस परिकल्पना को साकार करने की दिशा में प्रयासरत हैं। डा. चौहान ने बताया कि तरावड़ी में प्रस्तावित स्मारक के निर्माण का मामला वर्षों से लंबित होने का विषय उन्होंने झज्जर में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष उठाया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में इस विषय पर प्रतिक्रिया में सीएम ने भरोसा दिलाया कि अब बहुत जल्द तरावड़ी में बहुप्रतीक्षित स्मारक और शोध संस्थान बन सके, यह हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा। सम्राट पृथ्वीराज चौहान शौर्य, पराक्रम और बलिदान की भारतीय परंपरा के प्रतीक हैं। ऐसे में तरावड़ी में बनने वाले संस्थान द्वारा शोधपूर्वक इतिहास तोड़ने- मरोड़ने के षड्यंत्रों को असफल किया जाएगा।

सीएम ने पिछले कार्यकाल में की थी घोषणा

डा. चौहान के अनुसार करनाल के तरावड़ी में बनने वाले इस स्मारक के निर्माण की घोषणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ओर से अपनी सरकार के पहले कार्यकाल में की गई थी। लेकिन विभिन्न कारणों से यह परिकल्पना अब तक साकार नहीं हो सकी है। ऐसे में उन्होंने तरावड़ी में सम्राट पृथ्वीराज चौहान के किले के भग्नावशेष संरक्षित करने के कार्य में भी रक्षा मंत्री से मदद मांगी। रक्षा मंत्री ने मामले का विस्तृत विवरण प्राप्त होने पर हरसंभव हस्तक्षेप का आश्वासन दिया।

तरावड़ी ही गुजरे दौर का तराइन

डा. चौहान ने बताया कि इस मामले में जल्द एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचकर भारत में पुरातत्व सर्वेक्षण के उच्चाधिकारियों से शीघ्र प्रभावी हस्तक्षेप की मांग करेगा। ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष और भाजपा नेता डा. चौहान के अनुसार करनाल के जीटी रोड से सटा तरावड़ी ही वस्तुत: वह ऐतिहासिक स्थान है, जिसे पूर्व में तराइन के नाम से जाना जाता था। इसी स्थान पर मोहम्मद शहाबुद्दीन गोरी से सम्राट पृथ्वीराज चौहान के नेतृत्व में भारतीय सेना का सामना हुआ था। इसलिए यहां जर्जर हालत में मौजूद सम्राट के किले की दीवारों और दरवाजों को संरक्षित स्मारक घोषित किया जाना समय की आवश्यकता है।

हरियाणा को गौरव प्राप्त है कि भारत के महान योद्धा और दिल्ली के अंतिम हिदू शासक सम्राट पृथ्वीराज चौहान का अंतिम संघर्ष यहां की धरती तरावड़ी में हुआ था। इसलिए तरावड़ी वीरों की पुण्यभूमि कहलाती है। पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद दिल्ली की सत्ता हमारे हाथ से चली गई थी। आजादी के 75 वर्ष बाद भी सम्राट पृथ्वीराज चौहान के किले के भग्नावशेषों का संरक्षण नहीं हुआ है। अब राज्य सरकार के सहयोग से तरावड़ी में शीघ्र सम्राट पृथ्वीराज चौहान के भव्य स्मारक और शोध केंद्र का निर्माण होगा।

डा. चौहान ने बताया कि राष्ट्र गौरव लौटाने के लिए मनोहर सरकार सतत प्रयासरत है। इसके तहत हरियाणा शिक्षा बोर्ड की कक्षा सात की इतिहास की पुस्तक में एक अध्याय सुहेलदेव व सम्राट पृथ्वीराज चौहान को समर्पित है। बोर्ड की किताबों में अब सम्राट पृथ्वीराज चौहान से लेकर मोहन सिंह मंडार तक सभी महापुरुषों के बारे में पढ़ने को मिलेगा।

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