कुपोषित बच्चों के लिए पानीपत सिविल अस्पताल का एनआरसी बना वरदान, मां को मिलता है 100 रुपये प्रतिदिन भत्ता

पानीपत :- पानीपत में बच्चों पर कुपोषण की काला छाया ग्रहण समान है. सिविल अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र(एनआरसी) बच्चों को कुपोषण से उबारने के लिए वरदान साबित हो रहा है. यहां हर माह छह 16-17 बच्चों को भर्ती किया जा रहा है. यहां बच्चों को इलाज और पौष्टिक भोजन मिलता है. सबसे अच्छी बात यह कि बच्चे की मां उसकी केयर के लिए केंद्र में रहती है, उसे भी 100 रुपये प्रतिदिन भत्ता दिया जाता है.

आंगनबाड़ी वर्कर कर रही लोगों को प्रेरित

महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी वर्कर व स्वास्थ्य विभाग की आशा वर्कर अभिभावकों को कुपोषण के शिकार बच्चों को एनआरसी में पहुंचाने के लिए प्रेरित करती हैं. इनमें कुपोषित (मैम) व अतिकुपोषित (सैम) बच्चे शामिल रहते हैं. आंकड़ों की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2021-22 में कुल 193 बच्चे भर्ती हुए. इनमें से 181 बच्चों को स्वास्थ्य लाभ होने पर डिस्चार्ज किया गया. छह बच्चे लामा (डाक्टर की मर्जी के खिलाफ मरीज को घर ले जाना)रहे. गति गंभीर स्थिति में छह बच्चों को उच्च फैसिलिटी के लिए रेफर किया गया. एक अप्रैल से सितंबर अंत तक 101 मरीज भर्ती हुए. 94 बच्चों को स्वस्थ होने पर छुट्टी दी गई. सात बच्चे लामा रहे एक भी बच्चा रेफर नहीं किया गया.

इन बच्चों की आयु छह माह से पांच साल के बीच रही. सिविल सर्जन डा. जयंत आहूजा ने कहा कि कुपोषण मुक्त हरियाणा अभियान तभी संभव है जब गर्भवती और बच्चों को पौष्टिक भोजन मिले. कोई बच्चा कुपोषण की श्रेणी में है तो उसे पोेषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराना चाहिए.

यह है नियम

पोषण पुनर्वास केंद्र में छह माह से पांच वर्ष आयु तक के कुपोषित, अति-कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए भर्ती किया जाता है. इलाज पौष्टिक आहार मिलता है. केंद्र सातों दिन चौबीसों घंटे खुलता है. बच्चे के साथ एक अभिभावक रहेगा. सरकार की ओर से उसे रोजाना 100 रुपये भत्ता मिलता है.

कुपोषण के लक्षण

-शारीरिक रूप से कमजोरी

-हृदय का ठीक से काम न करना

-लटकी और बेजान त्वचा

-हाथ-पैरों में सूजन

-कमजोर प्रतिरोधक क्षमता

-सिर और पेट बड़ा होना

-हाथ-पैर सहित अंगों का सही से विकास न होना

 

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