हरियाणा गांवों की सरकार में बढ़ी महिलाओं की चौधर, इस बार 50 फीसदी आरक्षण

चंडीगढ़ :- कभी कन्या भ्रूण हत्या, आनर किलिंग और घूंघट के लिए बदनाम रहे हरियाणा में महिलाओं की स्थिति तेजी से बदली है. खासकर लोकतंत्र में सबसे छोटी सरकार कही जाने वाली पंचायतों में, जहां महिलाओं का दबदबा लगातार बढ़ा है.

महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रदेश में पिछली बार 33 प्रतिशत आरक्षण लागू था, लेकिन 41 प्रतिशत से अधिक महिलाएं जीत हासिल कर सरपंच बनी. इस बार 50 प्रतिशत आरक्षण लागू होने के बाद आधी पंचायतों की चौधर महिलाओं के हाथ में होगी.

वर्ष 1956 में मेहता समिति की सिफारिशों के आधार पर त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था लागू हुई थी, लेकिन पंचायतों में महिलाओं की एक तिहाई भागीदारी 1992 में 73वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम पारित होने के बाद ही सुनिश्चित हो सकी. महिलाओं की सशक्त भागीदारी की दिशा में यह बड़ा कदम साबित हुआ जिसके बाद पंचायतों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ती गई.

पिछले चुनावों में प्रदेश में सरपंच के कुल 6186 पदों में से ग्रामीणों ने 2565 गांवों की सरपंची महिलाओं को सौंपी. इनमें से 44 प्रतिशत महिला सरपंचों की शैक्षणिक योग्यता 10वीं तो 245 महिला सरपंच स्नातक या इससे ऊपर की योग्यता रखती हैं.

महिला सरपंचों की औसत उम्र 32 वर्ष तो पुरुष सरपंचों की औसत उम्र 39 साल रही. इस दौरान यमुनानगर और करनाल में 45 प्रतिशत सरपंच महिलाएं थी. फरीदाबाद, फतेहाबाद, गुरुग्राम, मेवात, पलवल, रोहतक, कैथल, हिसार, झज्जर, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़ जिलों में भी 40 प्रतिशत से अधिक सरपंच महिलाएं ही बनी.

100 सर्वश्रेष्ठ महिला प्रतिनिधियों को सम्मान से बढ़ा हौंसला

हरियाणा में पहली बार पंचायती राज में बतौर जनप्रतिनिधि श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली 100 महिला पंच-सरपंचों, जिला परिषद और ब्लाक समिति सदस्यों को स्कूटी देने की शुरुआत की गई है. इससे महिला प्रतिनिधियों में बेहतर काम करने की होड़ लगी है. शैक्षणिक योग्यता की शर्तें लगाने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की गुणवत्ता बढ़ी है.

महिलाओं को चौधर देने में सबसे आगे करनाल और यमुनानगर

जिला महिला सरपंच (वर्ष 2016)

करनाल -45.79

यमुनानगर -45.01

कैथल -43.48

अंबाला -43.63

गुरुग्राम – 43.0

सिरसा -42.73

पलवल -41.70

फतेहाबाद -41.63

नूंह -41.46

पानीपत -41.38

महेंद्रगढ़ – 41.33

कुरुक्षेत्र -41.07

हिसार -40.91

फरीदाबाद – 40.52

रोहतक -40.29

साेनीपत -40.13

झज्जर -40.00

रेवाड़ी -38.83

जींद -38.54

भिवानी -38.25

पंचकूला -34.92

हरियाणा -41.46

नारी शक्ति ने राजनीति को दिए नए आयाम

स्वर्गीय सुषमा स्वराज, सुचेता कृपलानी, चंद्रावती के साथ ही कुमारी सैलजा ऐसे बड़े नाम हैं जो हरियाणा की राजनीतिक पृष्ठभूमि से निकलकर राजनीति के बड़े मुकाम तक पहुंची. इतना ही नहीं विधानसभा में भी महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है. वर्ष 2014 में रिकार्ड 13 महिलाएं विधायक बनकर विधानसभा पहुंची. हालांकि मौजूदा विधानसभा में केवल आठ महिलाएं ही विधायक बन पाई हैं.

बदलनी होगी सोच

लोकतंत्र में सबसे छोटी सरकार कही जाने वाली पंचायतों में लागू आरक्षण के बलबूते महिलाएं अपनी हिस्सेदारी तो हासिल कर रही हैं, लेकिन पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ने में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई हैं. अधिकतर महिला पंचायत प्रतिनिधि अपने घर की दहलीज को पार नहीं कर पा रही हैं. पुरुष रिश्तेदार उनके प्रतिनिधि बनकर सरपंची का कामकाज देखते हैं.

चूंकि महिला सशक्तीकरण के लिए आरक्षण दिया गया है, इसलिए सभी महिला पंचायत प्रतिनिधियों को आगे बढ़कर अधिकारों का प्रयोग करते हुए अपने फैसले खुद लेने चाहिए. मुख्यमंत्री मनोहर लाल कहते हैं कि सरकार की तरफ से भी बैठकों में केवल महिला सरपंचों को शामिल होने की इजाजत दी गई है. निश्चित तौर पर महिला सरपंच अपने अधिकारों को लेकर जागरूक होंगी.

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